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नवम्बर की एक शाम

दिन भर की थकान के बाद सूरज अब विदा हो रहा था। मैं खिड़की से बाहर झांकते हुए सूरज की विदाई कर रही थीं। हाथ में चाय का प्याला था। दिन भर तप कर सूरज शीतल हो चुका था। सूरज की शीतलता और चाय की गरमाहट को मैं सहज महसूस कर ही रही थी कि तुम्हारी याद आ गई। मन […]