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Poem
माँ

माँ

रूह खुशी से भर जाती है,
जब मां तू मुस्कुराती है,
नरम बिस्तर तो बहुत हैं,
लेकिन नींद अच्छी तेरी गोद में ही आती है।
खाना खाके भूँख तो रोज़ ही मिट जाती है,
लेकिन संतुष्टि तभी मिल पाती है
जब तू हाथ से खिलाती है।
तू बालों जैसे
मन को कोमल बनती है,
और तू ही बालों जैसे
मजबूत बनकर जीना भी सिखाती है।
दोस्त बनकर तू मुझमें आत्मविश्वास जगाती है ,
मां जब तू हंसती  है 
तो तेरी बेटी गर्व से भर जाती है।

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