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Poem
दिल की अरमान

दिल की अरमान

ज़िन्दगी में बहुत से मौके आते हैं
जब वह बेजुबान रह जाते हैं
दिल में अरमान होठों पे चुप्पी
फिर भी हालत सब बयान करती है

किसी कमजोरी की है मुझे तलाश
उसके बिना बन ना जाऊँ मैं एक ज़िंदा लाश

जिससे मिला हूँ उसीने ही सराहा है
फिर भी क्यों दिल में एक प्यास बाकी है

बारिस कल भी अच्छी लगती थी आज भी लगती है
फिर भी मेरे मन में एक अधूरी सी प्यास आज भी है

जीवन की इस मोड़ पर कैसी बिकट परेशानी आयी है
नहीं किसी दोस्तों से या दुश्मनों से यह खुद ही खुद से लड़ती है

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