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कोमल है, कमजोर नहीं

मोनिका पाटीदार

“तोड़ कर हर बंदिश को,

“मुझको आसमान में उड़ जाना है …

तोड़ कर हर पिंजरे को,

उन्मुक्त सी गगन में इठलाना है …

तोड़ कर हर जंजीरों को,

स्वतंत्र हो दुनिया को दिखलाना है …

मै नारी हूँ, मै शक्ति हूँ,

गर्व से यह सबको बतलाना है ….”

इन पंक्तियो से जाहीर है, कि नारी किसी भी मायने में किसी से कम नहीं है। ना ही कम आँकी जानी चाहिए। आज महिलाए कंधे से कंधा मिला कर पुरुषो कि बराबरी करती हुई, इस पुरुष प्रधान समाज में अपनी विशेष जगह बना चुकी है।

महिला सशक्तिकरण कि सब बात करते है पर वास्तविकता में ये होते क्या है?

सामान्य शब्दो में कहा जा सकता है इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती है। जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर स्वयं ले सकती है। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तिकरण है। सशक्तिकरण के द्वारा वे परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है। अपनी पहचान बना सकती है।

 प्राचीन काल से ही महिलाओ ने इस पुरुष प्रधान समाज में अपने आप को साबित करने के लिए संघर्ष किया है। लैंगिक असमानता भारत में प्राचीन काल से चली आ रही है। प्राचीन काल से ही उन पर रुडिवादी परंपराए थोपी जाती रही है। लेकिन अब समय बदल रहा है और इस बदलते समय के साथ अब  महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाना बहुत जरूरी है, देश की आधी आबादी महिलाओं कि है, और उनके हर क्षेत्र में सशक्तिकरण के जरिये ही देश के विकास संभव है। महिलाओ कि तरक्की पर ही देश कि तरक्की निर्भर करती है , ये बात कभी नहीं भुलनी चाहिए। महिलायें समाज का स्तम्भ है, और किसी भी तरह से उपेछा का पात्र नहीं है।

श्री श्री रवि शंकर जी कहते है –  “सामाजिक असमानता, पारिवारिक हिंसा, अत्याचार और आर्थिक अनिर्भरता इन सभी से महिलाओं को छूटकारा पाना है तो जरुरत है महिला सशक्तिकरण की। 

पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा कहा गया वाक्य “लोगों को जगाने के लिये”, महिलाओं का जागृत होना जरुरी है।“

महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण कदम है, महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो। उसके लिए महिलाओ का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। और बेहतर शिक्षा कि शुरुवात बचपन से होती है। आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कि वजह से लड़कियां अशिक्षित रह जाती है। और उनका विवाह भी कम उम्र में करवा दिया जाता है। जिसे सुधारने की बड़ी जरूरत है।

महिलाए अगर सशक्त होगी तभी वो दहेज प्रथा, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा से डट कर लड़ सकेगी।

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के लिए सरकार द्वारा कई सारे संवैधानिक और कानूनी अधिकार बनाए और लागू किये गये है और उनके खिलाफ होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने का प्रयास किया गया है।

 सामाजिक मापदंड, लैंगिग भेदभाव,  बाल विवाह और अशिक्षा यह सभी कारण महिला सशक्तिकरण में एक बड़ी बाधा है। इनसे निजात पा कर ही महिलाओ को सुरक्षित महसूस करवाया जा सकता है।

जरुरत है कि महिलाओं के लिए पुरानी सोच को बदलना होगा तभी महिलाओ के साथ देश का विकास भी संभव है।

     “कोमल है, कमजोर  नहीं तू ….

    शक्ति का, नाम ही नारी है ….”

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