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कोमल है, कमजोर नहीं

मोनिका पाटीदार “तोड़ कर हर बंदिश को, “मुझको आसमान में उड़ जाना है … तोड़ कर हर पिंजरे को, उन्मुक्त सी गगन में इठलाना है … तोड़ कर हर जंजीरों को, स्वतंत्र हो दुनिया को दिखलाना है … मै नारी हूँ, मै शक्ति हूँ, गर्व से यह सबको बतलाना है ….” इन पंक्तियो से जाहीर है, कि नारी किसी भी […]

नवम्बर की एक शाम

दिन भर की थकान के बाद सूरज अब विदा हो रहा था। मैं खिड़की से बाहर झांकते हुए सूरज की विदाई कर रही थीं। हाथ में चाय का प्याला था। दिन भर तप कर सूरज शीतल हो चुका था। सूरज की शीतलता और चाय की गरमाहट को मैं सहज महसूस कर ही रही थी कि तुम्हारी याद आ गई। मन […]

राधा की रास स्वप्न

  यमुना की धारा में देखे खुद की तस्वीर,व्याकुल मन की दिखी अधीर लकीर।  हटा लिया चेहरा पानी से,चंचल मन को खुद ही कोसे।  ‘न करता वो मुझ से प्रेम,करके वादा झूमे वो गोपियों संग।’ सखी सखी बोल के सब को मन लुभाएन सुनी मेरी पुकार, कान्हा बड़ा सताए। ‘न करुँगी आज उस से बात,रूठी हूं अब न करुँ इंतज़ार।’ […]

जय हिन्द जय भारत

हमनें रात वो अमर पाई हैंआज़ादी की कीमत पाई हैंहुए  अंग्रेजों से आज़ाद परद्वंद्व अनेक मन में पाई हैं बलिदानों की गीत गायी हैंभगत ,सुभाष ,शिवाजी खोये हैंमरके बी अमर हो गए इस मिटी ने वो बीर पाई हैं आज़ाद हुए बस सत्ता सेमानसिक आज़ादी की बारी हैंछोड़ दे भाई अब जातपातहमनें हिन्दुस्तान की ऋण पाया  हैं देश के लिए जीना […]

संगीत क्लास

     उस दिन पुरानी डायरी साफ करते करते एक कागज का टुकड़ा खिसक कर मेरे पैरों में आ गिरा और मैं उस टुकड़े को उठाते-उठाते अतीत में खो गई। पास में किसी पुराने फ़िल्म की गाना बज रहा था और मैं उस बीते हुए कल में उस गाने को ढूंढ रही थी जो मुझे बहुत पसंद थी। सब कुछ […]

दुर्योधन

इतिहास के पन्नो पे हारनेवालों के काम नहीँ इसीलिए महाभारत में दुर्योधन का ज्यादा नाम नहीं। उसके शासन समय किया था जातिवाद विलय कर्ण को सब कहे अछूत पहनाया वो राजमुकुट। राजपद के लिये किया समर सबने किया उसे गलत विचार पांडव का कैसा राजतिलक जबकि श्राप से पाण्डु थे नपुंसक। दोस्ती का जब आये मिसाल कर्ण दुर्योधन होंगे अव्वल […]

मेरे कन्हैया

कृष्ण का नाम को जो भी गाए मृत्यु पर भी विजय वह पाए। कृष्ण बिना कुछ याद ना आये हर पल दिल, कान्हा, तुझको बुलाये । कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, कृष्णाय आत्मा मेरी तुझको बुलाये । दर्शन दे दे एक बार तू क्यों मुझको तू इतना रुलाये ? भोजन करती हूँ ना कभी अकेले मेरेअर्पण करती हूँ तुझको ही पहले । […]

कुछ बातें अनुभव की

बिन सवेरा शाम कभी ढ़लती नहीं भीगी रेत आसानी से मुट्ठी से फ़िसलती नहीं हर उम्मीद से जीने की तमन्ना बढ़ती जाती है ऐसे ही ये ज़िन्दगी निकलती नहीं सुखी ज़मीन भी तो बंजर कहलाती है तभी तो उसे उर्वर बनाने बारिश चली आती है खुशियों के साथ आँसुयों का होना ज़रूरी है भीगोके आंगन दोबारा नए उम्मीद जगाती है […]

चलो लिखते हैं।

चलो लिखते हैं। कुछ खुद् के लिए, कुछ दूसरो के लिए, चलो लिखते हैं। पहले शुरू करते हैं तुमसे फिर पूछेंगे किसी और से। लिखते हैं तुम्हारी हकीकत साथ छुपी तुम्हारी शरारत। जानते हैं मुस्कराहट के पीछे छुपा ग़म, क्यों बिस्तर पे आँखें होती है नम। चलो लिखते हैं। लिखते हैं लिखने की वजह, ज़िन्दगी की तलाश या खुद को […]

अब न जाने कैसा होगा मेरा गाँव

क्योंकि अब तो ……न वो चौपाल हैंन वो गौ-पाल हैंन वो पनघट हैन वो युवाओंका जमघट हैन वो पनिहारिन हैंन वो मजदूरिन हैंन वो चेतवान हैंन वो किसान हैंन वो चरवैये हैंन वो गवैये हैंन वो घर खपरैल हैंन गुल्ली-डंडा खेल हैंन वो गन्नों के खेत हैंन वो मास्साब की बेंत हैंजहाँ हम नहाते थेन वो घाट हैंन वो कच्ची […]